मधुबनी: एक बैरागन कैसे बन गई सुहागन

कहावत है कि दूल्हा-दुल्हन राजी तो क्या करेगा काजी… बिहार के मधुबनी जिले के एक थाने में घंटों चले ड्रामे के बाद आखिरकार प्यार की जीत हुई।पुलिस की कोशिशें रंग लाई और एक नवविवाहित जोड़े को बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद मिल गया।

घरवालों की मर्जी के बगैर मंदिर में शादी रचा चुके एक प्रेमी जोड़े को मधुबनी पुलिस की मदद से आखिरकार अपनों ने अपना लिया। ये शादी इसलिए भी खास रही क्योंकि दुल्हन रुपम प्रियदर्शी कुछ दिन पहले तक सांसारिक सुखों को त्याग कर वैराग्य धारण कर चुकी थीं। गले में तुलसी की मोटी माला और माथे पर चंदन की लेप लगाकर भक्तों के बीच भागवत कथा का वाचन करती थीं।

लेकिन कुछ दिन पहले एक भागवत कथा के दौरान मधुबनी निवासी त्रिभुवन झा से रुपम की आंखें चार हुईं और जल्द ही दोनों का प्यार परवान चढ़ने लगा। आखिरकार दोनों ने घरवालों की मर्जी के बगैर कोर्ट में शपथ पत्र देकर मंदिर में शादी रचा ली। लेकिन घरवालों की मर्जी के बगैर हुई इस शादी में अड़चन आ गई।

शादी के बाद मुजफ्फरपुर निवासी लड़की के घरवालों ने लड़के के परिजनों पर प्राथमिकी दर्ज करवाने के लिए मधुबनी टाउन थाने में आवेदन दिया था, लेकिन पुलिस की कोशिशों से दोनों परिवार के बीच सुलह हो गई। थाना परिसर में घंटों चले ड्रामे के बाद आखिरकार प्यार की जीत हुई। दोनों पक्ष के लोग हंसी-खुशी नई-नवेली दुल्हन और दूल्हे को आशीर्वाद देने को राजी हो गए।

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