“राजद भुतहा घर” बताते हुए मंगनी लाल मंडल ने पार्टी छोड़ी

लोकसभा चुनाव के लिए टिकट वितरण में अति पिछड़ों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिये जाने से नाराज राजद के उपाध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने बुधवार को पार्टी छोड़ दी। उन्होंने राजद को भुतहा घर करार देते हुये पार्टी की प्राथमिक सदस्यता के साथ-साथ सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। उनके साथ राजद छोड़ने वाले नेताओं में रामबदन राय, जगतनारायण सिंह, मणिकांत आदि शामिल थे। मंगनी लाल मंडल ने आरोप लगाया कि राजद में उन सभी नेताओं को दरकिनार कर दिया गया जो सामाजिक न्याय और गरीब गुरबों को इंसाफ दिलाने में यकीन करते थे। ऐसे निष्ठावान नेताओं की जगह , टिकट वितरण के दौरान उन लोगों को तरजीह दी गई जो सामाजिक न्याय और संविधान के बारे में कुछ भी नहीं जानते हैं।


उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले अतिपछड़ों के एक सम्मेलन में तेजस्वी यादव ने वादा किया था कि टिकट वितरण में अतिपिछड़ों को 40 फीसद आरक्षण दिया जाएगा लेकिन राजद की ओर से महज एक अतिपिछड़ा बूलो मंडल को टिकट दिया गया। उन्होंने कहा कि इससे ज्यादा तो नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने पिछड़ों को टिकट वितरण में प्रतिनिधित्व दिया है। जदयू की ओर से 6 अतिपिछड़े उम्मीदवारों को टिकट दिया गया है। राजद के मुकाबले जदयू ने नीतीश कुमार के नेतृत्व में पिछड़ों के लिए ज्यादा काम किया है। इसी तरह भाजपा ने भी 2 अतिपिछड़े उम्मीदवारों को टिकट दिया है। उन्होंने कहा कि दुख इस बात का है कि राजद सिर्फ अति पिछड़ों के बारे में बातें करता है, लेकिन जब विधानसभा, विधान परिषद, राज्यसभा और लोकसभा के चुनाव में अति पिछड़ों को टिकट देने की बारी आती है तो उन्हें अंगूठा दिखा देता है। राजद के इस रवैये को लेकर अति पिछड़ों में भारी असंतोष है।

उन्होंने कहा कि खबर तो यहां तक सुनी जा रही है कि राजद ने पैसे लेकर उम्मीदवारों को टिकट दिये हैं। यह बात खुद उम्मीदवारों के करीबी घूम-घूम कर कह रहे हैं। राजद से पढ़े लिखे यादव नेता नवल किशोर यादव और रामकृपाल यादव पहले ही पार्टी छोड़ चुके हैं। इस बार राजद ने विभा देवी जैसी नेता को टिकट दिया है, जिन्हें संविधान के बारे में कोई जानकारी नहीं है। अब भला ये संविधान बचाने की लड़ाई क्या लड़ेंगी। इसी तरह गुलाब यादव सिर्फ दस्तखत करना जानते हैं। इन पर कई आपराधिक मामले भी दर्ज हैं। इनमें से एक मामला रेप का भी है। ऐसे नेताओं को टिकट देने का औचित्य समझ से परे हैं। उन्होंने कहा राजद की इस अन्यायपूर्ण टिकट वितरण की नीति का विरोध करते हुये वह पार्टी के उपाध्यक्ष पद, कार्यसमिति की सदस्यता के साथ -साथ प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे रहे हैं। इसके बाद रामबदन राय, जगत नारायण सिंह, गोपाल मंडल आदि ने भी पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया।

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